skip to main
|
skip to sidebar
रविवार, नवंबर 08, 2009
शिद्दत से जिसे चाहा था,
वो अब मुद्दत से याद आते हैं,
किसे कहें अपना,
जब दोस्त ही भरी महफिल में तमाचा मार जाते हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
GULZAAR
फ़ॉलोअर
मेरे बारे में
vini
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें